शुक्र की महादशा का प्रभाव | व्यक्ति बन जाता है रंक से राजा

नौ ग्रहों में सर्वाधिक चलने वाली दशा
शुक्र ग्रह  की महादशा 20 साल की होती  है। इसलिए शुक्र की महादशा का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर 20 साल  तक रहता है।

आइए पहले हम शुक्र ग्रह की प्रकृति को समझे और जाने की कौन कौन सी क्रियाओं और वस्तुओं का प्रतिनिधित्व शुक्र ग्रह करते हैं।

• शुक्र अर्थात ऐशोआराम की वस्तुएं जिन्हें हम “लक्ज़री” कहते है। हर प्रकार की विलासितापूर्ण वस्तुओं के कारक शुक्र हैं।

• शुक्र अर्थात स्त्री। स्त्रियों के स्थिर कारक शुक्र है।

• शुक्र अर्थात वाहन! साईकल, बाइक,   कार से लेकर  विमान तक हर प्रकार के वाहन के कारक शुक्र हैं।

• शुक्र जिस रत्न का प्रतिनिधित्व करता है वह  बहुमूल्य रत्न हीरा है। शुक्र अर्थात श्रृंगार। बेहतरीन से बेहतरीन गहने और विशेषकर हीरे जड़े गहनों के कारक शुक्र हैं।

• शुक्र अर्थात काम । काम क्रियाओं और स्त्री संसर्ग के कारक शुक्र हैं।

• शुक्र अर्थात संगीत। हर प्रकार के गीत, संगीत और वाद्ययंत्रों के कारक केवल और केवल शुक्र ग्रह हैं।

• शुक्र अर्थात नाटक, अभिनय। संसार का प्रत्येक अभिनेता-अभिनेत्री शुक्र के प्रभाव में ही रहते हैं क्योकि शुक्र ही अभिनय का , फिल्मों का कारक है।

इसके अतिरिक्त भी शुक्र के और भी कई कारकत्व है किन्तु हमें अभी यहाँ  मुख्य विषय ही जानना उचित है।

अगर शुक्र ग्रह किसी जातक के लिए शुभ फलदायी है तो ऊपर वर्णित सभी क्षेत्रों में अपार सुख प्राप्त होगा।

चलिए कुछ उदाहरण लेते हैं और देखते हैं कि  जब शुक्र की महादशा आयी तब प्रसिद्ध लोगो के जीवन मे शुक्र ग्रह ने कैसे फल प्रदान किए।

सबसे पहले संजय गाँधी का उदाहरण लेते हैं:

संजय गाँधी जी का जन्म 14 दिसंबर, 1946 , प्रातः 9:27 पर दिल्ली में हुआ।

• मकर लग्न की इस जन्म पत्रिका मे योगकारक शुक्र स्वराशि में मालव्य योग निर्माण कर रहे है जो एक प्रचण्ड राजयोग है।

• नवमांश कुण्डली  में भी पञ्चम भाव मे स्वराशि में स्थित होकर शनि के साथ उत्तम राजयोग निर्माण कर रहे है।

• दशमांश कुण्डली (कार्य व्यवसाय) में भी योगकारक होकर राज्य भाव मे स्थित है।

अर्थात ओवरऑल जीवन मे राजा जैसा सुख, भाग्य के लिए अति उत्तम समय और कार्य व्यवसाय के लिए भी राजा जैसा समय।

लोकतांत्रिक भारत के नेहरू राजवंश के सबसे चहेते राजकुमार संजीव गाँधी जी, इनकी शुक्र की महादशा 1947 में आरम्भ हुई और देश स्वतंत्र होते ही इनके नानाजी प्रथम प्रधानमंत्री बन गए और नानाजी के जाने के कुछ ही समय बाद इनकी माँ प्रधानमंत्री बन गयी।

नेहरू राजवंश के चरम उत्कर्ष के समय इनकी 20 वर्षो की शुक्र की महादशा थी जिसमे सुख-साधन, विलासिता, रुतबा, शोहरत इन सब की भला क्या कमी होना थी!

जिनके नाना के लिए पसंदीदा सिगरेट लाने विमान उड़ जाते थे उनके लिए विमानों की, कारों की लाइन लगी रहना कोई अतिश्योक्ति नही।

बेताज बादशाही वाले आलम!

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एमा वाट्सन

15 अप्रैल 1990 संध्या 6 बजे पेरिस फ्रांस

(15 अप्रैल 1990 संध्या 6 बजे पेरिस फ्रांस)

• कन्या लग्न की इस जन्म पत्रिका में शुक्र छठे संघर्षों के भाव मे स्थित है किंतु योगकारक है तथा बृहस्पति की अमृत दृष्टि से लाभान्वित हो रहे है।

• नवमांश कुण्डली (भाग्य) में तो शुक्र योगकारक होकर शुभ द्वितीय भाव मे बिना किसी अशुभ योग के स्थित है।

• दशमांश कुण्डली (कार्य व्ययसाय) में भी शुक्र योगकारक होकर शुभ द्वितीय भाव मे बिना किसी अशुभ योग के स्थित है।

अर्थात ओवरऑल जीवन के लिए संघर्षों के बाद सफलता, भाग्य के लिए लाभकारी तथा कार्य व्यवसाय के लिए भी लाभकारी।

इन्हें शुक्र की महादशा आरम्भ हुई फरवरी 1996 से और साल 1999 में हैरी पॉटर फ़िल्म के प्रथम संस्करण के लिए इनका चयन हो गया।

1999 से 2009 तक हैरी पॉटर की फिल्मों के अभिनय के बाद हॉलीवुड की अनेक फिल्मों में कार्य किया और पूरी शुक्र की महादशा यानी साल 2016 तक अभिनय में अत्यंत सक्रिय रही।

अब शुक्र महादशा पूरी होते ही ये लाइम लाइट से लगभग दूर ही है ।

क्रिस्टियानो रोनाल्डो

(5 फरवरी 1985 प्रातः 4 बजे फुंचाल पुर्तगाल)

(5 फरवरी 1985 प्रातः 4 बजे फुंचाल पुर्तगाल)

• वृश्चिक लग्न की इस जन्म पत्रिका में शुक्र महान योगकारक हो गए है क्योकि एक तो उच्चस्थ है और दूसरे लग्नेश मंगल के साथ राजयोग बना रहे है।

• नवमांश कुण्डली (भाग्य) में भी योगकारक होकर परम शुभ भाग्य भाव नवम भाव मे स्थित है, अर्थात भाग्य की उत्तरोत्तर वृद्धि।

• दशमांश कुण्डली में (कार्य-व्यवसाय) तो लग्न में ही स्थित होकर बुध-मंगल के साथ एक राजयोग बना रहे है।

अर्थात ओवरऑल जीवन के लिए भी उत्तम, भाग्य के लिए भी उत्तम और कार्य व्यवसाय के लिए भी उत्तम!

2009 से शुक्र महादशा आरम्भ हुई और मैनचेस्टर यूनाइटेड से रियल मैड्रिड में जाते ही विश्व फुटबॉल जगत में धमाका कर दिया।

सबसे ज़्यादा गोल के कीर्तिमान, सबसे ज़्यादा फॉलोवर्स के कीर्तिमान, सबसे अधिक धन कमाने के कीर्तिमान तो रहे ही रहे साथ ही शुक्र के यहाँ पञ्चम भाव (सम्मान/पुरस्कार/संतान प्राप्ति) मे होने से अनेकानेक अवॉर्ड्स भी मिले और अनेक संतानों की भी प्राप्ति हुई।

खरबो डॉलर का कार कलेक्शन, एक या दो जेट विमान तथा अरबो डॉलर की याट भी है इनके पास। इसके साथ ही साथ दुनिया भर में अनेक महलनुमा घर और होटल के भी मालिक बन गए है शुक्र महादशा के समय।

ये वो कुछ  व्यक्ति थे जो जनता के बीच मशहूर रहे हैं और इनका जीवन खुली किताब की तरह रहा है।

इन उदाहरणों से हमने देखा शुक्र की महादशा का प्रभाव व्यक्ति को मौज और  ऐशोआराम भरा जीवन देता है।


अशुभ शुक्र की महादशा का प्रभाव

अब शुक्र अगर नीचस्थ है अथवा अशुभ योग या दृष्टि द्वारा पीड़ित है तथा यही सब योग नवमांश कुण्डली और दशमांश कुण्डली में भी उपस्थित है तब शुक्र की महादशा पीड़ादायक सिद्ध होगी।

• वस्त्रों के सुख का अभाव रहेगा। किसी से मांगकर अथवा उतरे हुए वस्त्र पहनना-गंदे फटे पुराने वस्त्र पहनने पड़ सकते है।

• वाहन का अभाव-अच्छे घर का अभाव रहेगा। पुराने वाहन प्रयोग करना और जीर्ण शीर्ण भवन में निवास करना पड़ सकता है।

• मन मे बुरे विचारों की प्रबलता रहेगी। स्त्रियों के प्रति अशुभ दृष्टि तथा काम वासना पर नियंत्रण रख पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

• मूत्र संबंधित विकार-किडनी संबंधित विकार रहेंगे। नपुंसकता रह सकती है।

• धन का अभाव सम्भव है तथा निरंतर स्त्रियों द्वारा अपमानित होना पड़ सकता है।

ये सब कुछ तभी घटित होगा जब लग्न कुण्डली के साथ साथ नवमांश-दशमांश-षष्ठयांश तथा कारकांश में भी शुक्र की स्थिति बहुत विपरीत हो, इसीलिए आप अपने ऊपर ये सब फॉर्मूले लगाकर व्यर्थ में ना ही चिंतित हो और ना ही भ्रमित हो।

आशा है कि थोड़ा सा शुक्र महादशा का शुभाशुभ फल आपलोगो के सामने रखने में मैं सफल हो पाया, अगर आपको पढ़ने में रोचक लग रहे है तो ज्योतिष से संबंधित लेख निरंतर लिखने का मेरा प्रयास रहेगा।

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